प्राइवेट बैंक क्या है महत्व एवं अंतर | Private Sector Bank In Hindi

Private Sector Bank Kya Hai In Hindi: देश की economy की growth के लिए बैंकों का योगदान priceless होता है. किसी देश में बैंकों का जाल बिछाने के लिए विभिन्न प्रकार के बैंकों को स्थापित किया जाता है. इसमें से प्राइवेट सेक्टर बैंक,एक important role play करता होता है.

आज इस article के माध्यम से हम आपको प्राइवेट सेक्टर बैंक और उससे संबंधित facts जैसे कि प्राइवेट बैंक क्या है? महत्व,उद्देश्य,लाभ और हानि तथा प्राइवेट सेक्टर बैंक और पब्लिक सेक्टर बैंक में अंतर क्या है यह जानेंगे.

प्राइवेट सेक्टर बैंक क्या है (Private Sector Bank In Hindi)

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प्राइवेट सेक्टर बैंक एक साधारण commercial बैंक होती है जो अपनी specific services के लिए जानी जाती है तथा अपने customer को विभिन्न प्रकार के services प्रदान करती है. इन्हें निजी बैंक भी कहते है.

प्राइवेट सेक्टर बैंक किसी एक specific personal अथवा किसी एक बड़े institute के माध्यम से conduct होता है.तथा ये बैंक प्राइवेट इसलिए कहलाते है क्योंकि इन बैंको का अधिकांश share (50% से अधिक) किसी private personal के हाथों में होता है.

तो एक प्राइवेट सेक्टर बैंक का पब्लिक सेक्टर बैंक से मुख्य अंतर उनके owner के आधार पर होता है. जहां एक ओर पब्लिक सेक्टर बैंक के 50% से अधिक शेयर सरकार के हाथ में होता है वहीं ठीक इसके विपरीत प्राइवेट सेक्टर बैंक के किसी एक person के पास ही decisions पर signature करने और उनका execution करने का अधिकार प्राप्त होता है.

प्राइवेट सेक्टर बैंक का इतिहास

यदि भारत के regarding में प्राइवेट सेक्टर banks के विषय में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करें तो हम पाते हैं कि भारत में दो प्रकार के प्राइवेट बैंकों को categorized किया गया है,जो किहै –

  •  पुराने प्राइवेट सेक्टर बैंक(old private sector banks)
  • नए प्राइवेट सेक्टर बैंक (New private sector banks)

भारत में प्राइवेट सेक्टर बैंक के इतिहास को जानने के लिए उपरोक्त दोनों बैंकों के विषय में जानना आवश्यक है. आइए अब हम एक-एक करके भारत के प्राइवेट बैंक का इतिहास समझते हैं.

पुराने प्राइवेट सेक्टर बैंक (old private sector banks)

ऐसे प्राइवेट सेक्टर बैंक जो स्वतंत्रता के पूर्व (before independence) स्थापित हुए थे उन्हें पुराने प्राइवेट सेक्टर बैंक के नाम से जाना जाता है.

भारत में इन बैंकों की संख्या कुल 12 है जो कि निम्नलिखित है –

  1. Catholic Syrian Bank
  2. City Union Bank
  3. Dhanlaxmi Bank
  4. Federal Bank
  5. Jammu and Kashmir Bank
  6. Karnataka Bank
  7. Karur Vysya Bank
  8. Lakshmi Vilas Bank
  9. Nainital Bank
  10. Ratnakar Bank
  11. South Indian Bank
  12. Tamilnad Mercantile Bank

नए प्राइवेट सेक्टर बैंक(New private sector banks)

ऐसे private sector bank जिनका establishment after independence हुआ है उसे new प्राइवेट सेक्टर बैंक के नाम से जाना जाता है. भारत में Top निजी बैंकों की कुल संख्या 9 है. जो कि निम्नलिखित है –

  1. Axis Bank
  2. Development Credit Bank (DCB Bank Ltd)
  3. HDFC Bank
  4. ICICI Bank
  5. IndusInd Bank
  6. Kotak Mahindra Bank
  7. Yes Bank
  8. IDFC
  9. Bandhan Bank of Bandhan Financial Services.

इस बात को हमेशा याद रखें कि उपरोक्त दी गई सारी प्राइवेट सेक्टर बैंक अनुसूचित बैंक (scheduled bank) की श्रेणी में आते है.

प्राइवेट सेक्टर बैंक का महत्व

Indian economy में प्राइवेट सेक्टर बैंक का एक विशेष महत्व है.जहां एक ओर यह employment जैसे dimensions में high level पर कार्य कर रहा है.वहीं दूसरी ओर इसके चलते गरीबी जैसी बिमारी से भी ग्रामीण क्षेत्रों में काफी निजात मिली है. ऐसे ही कुछ अन्य importance of private sector banks निम्नलिखित है –

  • भारतीय जनता की life quality में सुधार करना.
  • इसने essential services तक लोगो की पहुंच में वृद्धिकिया.
  • Money flow को बनाए रखने और उसे निरंतर market में increase करने का कार्य किया.
  • अनिवार्य सेवाओं के मूल्य को decrease करने का कार्य किया.
  • Human capital को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया.
  • Middle class indian के जीवन शैली में बैंको से संबंधित मूलभूत परिवर्तन लाया.
  • भारत में गरीबी रेखा के नीचे रह रहे लोगों की संख्या में काफी कमी लाने का कार्य किया.
  • भारत की पुरानी agriculture based concept कोनवीन manufacturing concept में परिवर्तित करने का कार्य किया.
  • अर्थव्यवस्था पर research and development कोअधिक बढ़ावा मिला.
  • स्कूल education और तकनीकी अध्ययन की ओर अधिक ध्यान केंद्रित करने का कार्य किया.
  • बैंकिंग क्षेत्र में पब्लिक सेक्टर बैंकोके दबदबे और monopoly (एकल अधिकार) को कुछ कम करके जनता को बेहतर सर्विसेस प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया.

प्राइवेट सेक्टर बैंक की कार्यप्रणाली

जैसे कि आपको पता है कि, प्राइवेट सेक्टर बैंक ऐसे बैंक होते हैं जिसमे किसी एक private owner अथवा private institute/company के द्वारा आधे से अधिक share holder होते है. इसके बावजूद यह बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के central bank guideline को मानने के लिए बाध्य होते है,साथ ही यह अपने ग्राहकों के लिए independent financial policy का creation कर सकते है.

इन बैंको का एक बड़ा हिस्सा share market में भी फैला होता है,जहां से ये अपना business और भी मजबूत करते है. इन शेयर को कोई भी व्यक्ति शेयर मार्केट से किसी भी पल खरीद सकता है तथा इनके business में कुछ योगदान कर सकता है तथा लाभ काpartner बन सकता है.

ऐसा देखा गया है कि एक प्राइवेट सेक्टर बैंक अन्य बैंकों के compareमें financial strategies में काफी अधिक चुस्त होते है, ये इतने अधिक active होते है कि market में घट रहे विभिन्न financial event के आधार पर अपने बैंक के immediate फैसले ले सकते हैं.इस कारण एक प्राइवेट सेक्टर बैंक में deposite और withdrawl दोनो के interest rate में immediate उतार चढ़ाव देखा जाता है.

ये बैंक ग्राहकों को विभिन्न सेवाओं के माध्यम से खुश करना जानते हैं. यह ग्राहकों के पक्ष में services को प्रदान करने वाले बैंकों के रूप में जाने जाते हैं. फिर चाहे उनके financial need को पूरा करना हो या interest rate का अन्य पब्लिक सेक्टर बैंक के तुलना में अधिक होना तथा loan को जल्दी से जल्दी प्राप्त करवाना, और तो और विभिन्न त्यौहारों में अलग-अलग तरीकों से अपने ग्राहकों को debit Card अथवा credit card में कुछ प्रतिशत का छूट प्रदान करना.हालांकि इन प्राइवेट सेक्टर बैंक में नौकरी की कोई security नहीं होती परंतु फिर भी यहां के कर्मचारी ग्राहकों को सभी प्रकार की सुविधाएं देने के लिए तत्पर होते हैं. इसी कारण से इन बैंकों में कर्मचारियों को उनकी skills एवं work experience के आधार पर promotion मिलता है.

यह बात भी सत्य है कि एक प्राइवेट सेक्टर बैंक अन्य बैंकों की तुलना में अपने Financial charges को high रखने के कारण कुख्यात है. साथ ही बहुत से बैंकों के compare में इन बैंको के deposit money पर interest भी बहुत कम प्राप्त होता है. हालांकि इन बैंको में account opening और loan प्राप्त करने जैसी सुविधाएं काफी सरल होती है. परंतु ये अपने loan पर extra charges भी बहुत अधिक मात्रा में लगाते है. Axis bank, प्राइवेट सेक्टर बैंक का एकबेहतरीन उदाहरण है जो काफी competitive भी है और अपने विशेष services के लिए भी जानी जाती है.

भारत के प्राइवेट सेक्टर बैंक की सूची

भारत में वैसे तो छोटे मोटे और बड़े level के बहुत बड़ी संख्या में प्राइवेट बैंक स्थापित हुए हैं, परंतु हम यहां आपको भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्राइवेट बैंक का लिस्ट प्रदर्शित कर रहे हैं.

तो जानिए प्राइवेट बैंक कौन कौन सी है.

बैंक का नामस्थापना तिथिमुख्यालय
HDFC bank1994मुंबई
Axis bank1993मुंबई
ICICI BANK1955वडोदरा
Kotak mahindra bank1985मुंबई
Yes bank2004मुंबई
Federal bank1931अलुवा
बंधन बैंक2001कोलकाता
City union bank1904कुंभकोणम
Idbi bank1964मुंबई
CSB bank1920त्रिशूर
DCB bank1930मुंबई
धनलक्ष्मी बैंक1927त्रिशूर
IDFC BANK1994मुंबई
Induslndबैंक1994मुंबई
RBL BANK1943मुंबई
कर्नाटक बैंक1924मंगलौर
नैनीताल बैंक1922मलिताल,नैनीताल
South Indian bank1929त्रिशूर
J&K bank1938श्रीनगर
Karurvysya bank1916Karur
Tamilnad mercantile bank1921तमिलनाडु
भारत के प्राइवेट सेक्टर बैंक की सूची

प्राइवेट सेक्टर बैंक के लाभ

प्राइवेट सेक्टर बैंक के लाभ निम्नलिखित हैं-

  • प्राइवेट सेक्टर बैंक से ग्राहकों को त्वरित सेवाएं प्राप्त होती है.
  • ग्राहकों के financial requirements के हिसाब से सुविधाएं प्रदान की जाती है.
  • प्राइवेट सेक्टर बैंक में एक सुव्यवस्थित management system होती है.
  • ये बैंक मार्केट के अनुरूप immideate action ले सकते है.
  • प्राइवेट बैंक के कर्मचारियों को अन्य क्षेत्र के बैंकों की तुलना में अधिक income generate करने का अवसर प्राप्त होता है.
  • प्राइवेट सेक्टर बैंक indian economy को boost करने का कार्य करती है.
  • Private sector bank में loan अत्यंततीव्र गति से प्राप्त होती है.जिससे स्वरोजगार एवम अन्य कदमों को उठाने में सहायता मिलती है.

प्राइवेट सेक्टर बैंक की हानियाँ

प्राइवेटसेक्टर बैंक की हानियां निम्नलिखित होती है –

  • इन बैंकों की सबसे बड़ी खामी यह है कि यह बैंक किसी भी क्षण transaction एवं service charge में परिवर्तन कर सकते हैं.
  • ये बैंक अधिकांशतः शहरों में ही स्थापित हो पाए हैं अर्थात इनका rural क्षेत्र में योगदान limited है.
  • प्राइवेट सेक्टर बैंक में कार्य करने वाले कर्मचारियों को job कीकोई security नहींहोती है.

प्राइवेट सेक्टर बैंक और  पब्लिक सेक्टर बैंक में अंतर

अंतर का आधारपब्लिक सेक्टर बैंकप्राइवेट सेक्टर बैंक
Law के आधार परइन बैंकों का registrationparliament द्वारा स्थापित law के अंतर्गत होता है. उदाहरण के लिए State bank of India (Additional bank) act(1959), एवं National bank Act (1970)इन बैंको का registrationIndian companies act (भारतीय कंपनी अधिनियम) के तहत होता है.
Ownership के आधार परइन बैंकों का ownership सरकार के हाथों में होता है.इन बैंकों का स्वामित्व प्राइवेट हाथों में होता है.
Shareholders के आधार परइन बैंकों के 50% से अधिक share government  के under में होता है.इन बैंकों का 50% से अधिक share किसी एक private individuals या private institutions के हाथों में होता है.
Regulatory institutions के आधार परइन बैंको का conduction, management, direction और guidelines, RBI द्वारा किया जाता है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को यह power, reserve Bank of india act 1934 के तहत मिलती है.इन बैंको का conduction, management, direction और guidelines,RBI द्वारा किया जाता है. हालांकि बैंक का Mamagement करने हेतु एक special private board की स्थापना बैंक के स्वामी (owner) के द्वारा किया जाता है.
foreign direct investment के आधार परएक पब्लिक सेक्टर बैंक में कोई foreign personal   या institute 20% से अधिक का Invest नहीं कर सकता.एक प्राइवेट सेक्टर बैंक में 74% से अधिक का foreign direct investment possible है हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कभी भी एक प्राइवेट सेक्टर बैंक में 10% से अधिक का विदेशी निवेश करने की मान्यता नहीं देती है.
CEO of Bank के चयन के आधार परइन बैंको के लिए Bank board of bureau (BBB) इस कार्य को करने हेतु एक Specific council होती है जो कि भारत सरकार द्वारा स्थापित एक Verified Institute है.एक प्राइवेट सेक्टर बैंक को अपने head को चुनने का लिए एक special council का गठन करने की मान्यता प्राप्त है हालांकि इस प्रकार की council के Construction हेतु रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के guideline का पालन करना अनिवार्य है.
Technology और development के आधार परएक पब्लिक सेक्टर बैंक किसी नई technology को अपनाने में काफी समय लगा देती है जिसके चलते उनकी Performance प्राइवेट बैंकों की तुलना में कम होती है.एक प्राइवेट सेक्टर बैंक अपने technology पर specially रूप से ध्यान देती है ताकि उनकी work system, सस्ती और अधिक Effective हो.
Number of branches के आधार परपब्लिक सेक्टर बैंक के branch भारत के प्रमुख शहरों से लेकर एक Block के छोटे-छोटे गांव तक फैले होते हैं ताकि वह Society के Welfare का कार्य Efficiently कर सके.प्राइवेट सेक्टर बैंक्स का मुख्य ध्यान भारत के प्रमुख महानगरों और कुछ छोटे शहरों तक सीमित होता है और इनका rural level पर पकड़ थोड़ा कम होता है. हालांकि वर्तमान समय में online banking बैंकिंग के माध्यम से इनका दायरा काफी विस्तृत हो चुका है तथा अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोबाइल होने से बैंकिंग हेतु physical banks की आवश्यकता नहीं होती.
Customer को प्रदान की जाने वाली services के आधार परहालांकि बैंकिंग services और अन्य services प्रदान करने में दोनों ही बैंक एक समान होते हैं परंतु फिर भी पब्लिक सेक्टर बैंक्स भारतीय जनता की Service के लिए बनी हुई है अतः वे विभिन्न प्रकार कीgovernment programs जैसेSubsidy  और loan जैसे प्रक्रियाओं को बहुत ही बेहतरीन तरीके से Perform  करती है.इनका कार्य भी public service करना तो होता है परंतु प्राइवेट बैंक होने की वजह से यह किसी Single owner के अधीन होते हैं जिसके कारण इन्हें जनता के profit की तुलना में उस owner के Profit के विषय में अधिक सोचना पड़ता है. जिसके चलते यह अपने ग्राहकों को Costumer care services तो प्रदान करती हैं परंतु इनकी ग्रामीण क्षेत्र तक अच्छी पैठ ना होने के कारण तथा government का help न होने के कारण यह Government programs जैसेSubsidy और अन्य service प्रदान करने में सक्षम नहीं होती है.
Loan distribution के आधार परएक पब्लिक सेक्टर बैंक में loan देने की व्यवस्था काफी slow होती है क्योंकि इसमें Paper work और अन्य formalities  को पूरा करने में काफी समय लगता है तथा Loan मांगने वाले व्यक्ति को आवेदन करने के बहुत समय पश्चात Loan प्राप्त करवाया जाता है.एक प्राइवेट सेक्टर बैंक में ग्राहक को पब्लिक सेक्टर बैंक की compare में अपेक्षाकृत आसानी से loan प्रदान किया जाता है क्योंकि यहां पेपर वर्क की संभावना बहुत कम होती है और इस कारण से लोन मांगने वाले व्यक्ति को खुद ही Office working days के अंतर्गत loan प्रदान कर दिया जाता है.
बैंक कर्मचारियों के चयन के आधार परएक पब्लिक सेक्टर बैंक में कर्मचारियों के चयन हेतु एक विशेष प्रकार की संस्था का गठन किया गया है जिसका नाम IBPS होता है यह समय-समय पर बैंक को हेतु विभिन्न पदों जैसे कि क्लर्क प्रोबेशन ऑफीसर स्पेशल ऑफिसर इत्यादि की चैन करने हेतु विशेष रूप से परीक्षा लेती है. इन परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने वाले युवा को बाद में प्रशिक्षण दिया जाता है जिसके पश्चात इनकी नियुक्ति सरकारी बैंकों में कर दी जाती है.कर्मचारियों के चयन हेतु कुछ प्राइवेट सेक्टर बैंक लिखित परीक्षा का आयोजन करते हैं तो कुछ प्रत्यक्ष साक्षात्कार के द्वारा कर्मचारियों की नियुक्ति करते है.
Bank employees  के promotion के आधार परएक पब्लिक सेक्टर बैंक में promotion के scale पहले से तय होते हैं और इस Scale या Guideline के अनुसार ही Employees का प्रमोशन किया जाता है. अर्थात किसी Employee को उसके Performance  के आधार पर Promotion  ना करके उनके Age और Experience  के आधार पर Promotion  दिया जाता है.एक प्राइवेट सेक्टर बैंक में employees का promotion उसके performance के आधार पर तय किया जाता है.
Education और skill के आधार परएक पब्लिक सेक्टर बैंक पर नियुक्त होने के लिए व्यक्ति को कम से कम Graduate  होना Necessary  होता है. तथा यहां Recruitment के लिए एक special exam से हो कर गुजरना पड़ता है, यह Exam Central level की होती है. जिसका अर्थ है कि ये Employees काफी Educated तो होते है. परंतु यहां Employees के Skills में कुछ कमी देखी जाती है क्योंकि यहां नए Technologies को अपनाने में काफी समय लगता है.एक प्राइवेट सेक्टर बैंक पर नियुक्त होने के लिए अधिकांशत अनुभव (experience) को देखा जाता है. अतः यहां employees selection के लिए education Primary नहीं secondary term होता है जबकि Experience primary. हालांकि Skills के level पर प्राइवेट सेक्टर बैंक पब्लिक सेक्टर बैंक की तुलना में कहीं अधिक आगे होते हैं.
Salary और other profits के आधार परपब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारियों के income निश्चित होते हैं अर्थात उन्हें एक Particular post के लिए payment प्रदान की जाती है चाहे वह किसी भी बैंक पर Work  करें. Central  द्वारा दी जाने वाली Payment  इन्हें महीने के एक निश्चित दिन प्रदान कर दी जाती है और इसके साथ ही इन्हें समय-समय पर Parliament  द्वारा तय किए गए Dearance एवं Other service allowance का लाभ भी मिलता है. कुल मिलाकर इन बैंकों में Income का Source निश्चित होता है.एक प्राइवेट सेक्टर बैंक में एक हद तक income source निश्चित होता है परंतु Job insecure होने के कारण इन बैंकों में Income source को निश्चित माना जाना सही नहीं होगा. हालांकि समय-समय पर किसी प्राइवेट सेक्टर बैंक के owner द्वारा dearance एवं Other service के allowance के लिए कुछ ammendment अवश्य किए जाते हैं.

एक प्राइवेट सेक्टर बैंक और पब्लिक सेक्टर बैंक में बेहतर कौन सा है?

किसी भी दो बैंकों के माध्यम जब तुलनात्मक रूप से अध्ययन किया जाता है तब यह जानकारी प्राप्त की जा सकती कि कौन सा बैंक बेहतर है.

यदि हम private sector bank और पब्लिक सेक्टर बैंक का अध्ययन करते हैं तो बहुत से मामलों में हमें प्राइवेट सेक्टर बैंक आगे जाते हुए दिखाई दे सकती है जो कि निम्नलिखित है –

  • सुविधाएं (services)
  • तीव्रता (fast work)
  • तकनीक (use of technology)
  • कुशलता (employees skills)
  • कर्मचारियो का व्यवहार (employement behaviour)
  • साफ – सफाई (atmosphere)
  • कार्यप्रणाली (work culture)
  • उद्देश्य (aim)
  • Work efficiency आदि.

जबकि कुछ अन्य चीजों में प्राइवेट सेक्टर बैंक एक पब्लिक सेक्टर बैंकों से काफी पीछे नजर आते हैं जैसे कि–

  • सरकारी योजनाओं के विषय में जानकारी.
  • जनता की निस्वार्थ सेवा भाव
  • कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) इत्यादि.
  • Interest rate की दर
  • Additional और hidden charges.

तो इस प्रकार से देखा जाए तो एक प्राइवेट सेक्टर बैंक एक पब्लिक सेक्टर बैंक की तुलना में कुछ facts में आगे निकल जाता है वही कुछ मामलों में इससे पीछे रहता है. तो यह हम पर निर्भर करता है कि हम किन points पर अपने बैंकिंग को preference देते हैं.

क्या प्राइवेट बैंक सुरक्षित होते हैं?

वर्तमान में हो रही विभिन्न घटनाओं के चलते इस प्रकार का प्रश्न आपके मन में उठना स्वाभाविक है. है जहां एक ओर भारत सरकार सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंपने जा रही है, वहीं प्राइवेट बैंकों का हाल यह है कि कुछ अमीर लोग इन प्राइवेट बैंक के head से समझौता करके अपनी पहचान बढ़ा लेते हैं और बाद में इन बैंकों से बड़े रकम की धोखाधड़ी करके भाग जाते हhead

यह रकम किसी और का नहीं जबकि भारत के जनता का ही होता है क्योंकि भारत की जनता इन बैंकों में अपने पैसों को deposite करके रखती है ऐसी स्थिति में लोगों के मन में यह प्रश्नआ ही जाता है कि क्या प्राइवेट बैंक सुरक्षित है?

यहां हम आपको बताना चाहेंगे कि यदि आप प्राइवेट सेक्टर बैंक में अपना account open करवाने के विषय में सोच रहे हैं तो आप बेझिझक account open करवा सकते हैं क्योंकि यहां होने वाले किसी भी प्रकार के corruption की जिम्मेदारी बैंक की होती है ना की किसी अन्य institute की.

अर्थात जब आपके बैंक से कोई व्यक्तिcorruption करके बहुत सारे रकम को चुराकर भागता है तो ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा प्रदत कानून के तहत आपको आपका मूल्य या जमा राशि प्रदान किया जाता है हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ समय अवश्य लगता है परंतु आपके द्वारा जमा किया गया पैसापूर्ण रूपसे आपको वापिस होता है.

FAQs: Private Bank In Hindi

क्या हम भी प्राइवेट सेक्टर बैंक में Account open करा सकते हैं?

वर्तमान समय में एक Indian Citizen किसी भी Indian Bank, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट किसी भी समय Account Open कर सकता है. Account Open करने के विषय में संपूर्ण जानकारी आप उस बैंक से प्राप्त कर सकते हैं जिस बैंक पर आप Account Open करवाना चाहते हैं.

कैसे जानेंगे कि कोई बैंक प्राइवेट है या पब्लिक?

इस लेख में हमने ऊपर में भारत में प्राइवेट बैंक की list उपलब्ध कराई है जिसे देख कर आप आसानी से जान सकते हैं कि भारत में कौन कौन से प्राइवेट सेक्टर बैंक वर्तमान में चल रही है.
इसके अलावा यदि आप किसी Moment किसी बैंक के सामने खड़े हो और जानना चाहते हो कि यह बैंक Government है अथवा private, तोऐसी स्थिति में आपको उस बैंक के नाम को गूगल पर सर्च करके पूछना चाहिए कि वह बैंक सरकारी है अथवा निजी इससे आप एक authenticresult पा सकते हैं.

क्या प्राइवेट सेक्टर बैंक से आसानी से लोन प्राप्त किया जा सकता है?

एक सरकारी बैंक की तुलना में प्राइवेट सेक्टर बैंक अपने Costumers को आसानी से किसी भी प्रकार के Services प्रदान करने का कार्य करते हैं. इन कार्यों में Loan देना भी शामिल होता है. एक प्राइवेट सेक्टर बैंककिसी भी अन्य बैंक की तुलना में बहुत ही सरल प्रक्रिया में लोन प्रदान करता है, जिसमें Paper Work की गुंजाइश भी बहुत कम होती है. हालांकि Loan जिस प्रकार से Provide किया जाता है उसी प्रकार से इसकी वसूली का Processभी होता है अतः एक प्राइवेट सेक्टर बैंक से लोन लेने से पूर्व आपको अच्छे से सोच विचार कर लेना चाहिए.

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अंतिम शब्द: प्राइवेट सेक्टर बैंक क्या है हिंदी में  

इस लेख में हमने आपको प्राइवेट सेक्टर बैंक क्या होता है? उसका उद्देश्य,महत्व, लाभ और हानियां तथा प्राइवेट सेक्टर बैंक और पब्लिक सेक्टर बैंक के मध्य क्या क्या अंतर होता है. इन सभी विषयों में जानकारी प्रदान की है. आशा करते हैं कि यह लेख आपको काफी पसंद आया होगा यदि आपके मन में प्राइवेट सेक्टर बैंक से संबंधित किसी भी प्रकार का प्रश्न है तो आप नीचे कमेंटबॉक्स के माध्यम से उसे पूछ सकते हैं हम उस प्रश्न का उत्तर जल्द से जल्द देने का प्रयास करेंगे, धन्यवाद.

नमस्कार ! मेरा नाम रणजीत सिंह है और इस Best Hindi Blog का संस्थापक हूँ. मुझे ब्लॉग्गिंग, एसईओ और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों पर गहरी नॉलेज है! हमारे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद.

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