अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) क्या है इसके प्रकार (Semiconductor in Hindi)

Types of semiconductor In Hindi: इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चाहे कंप्यूटर हो के बारे में तो आप जानते ही होंगे जैसे कि डायोड, ट्रांजिस्टर, इंटिग्रेटेड सर्किट आदि, ये सभी एक विशेष सामग्री से बनाए जाते हैं जिन्हें अर्धचालक या सेमीकंडक्टर कहा जाता है.

लेकिन क्या आप जानते हैं अर्धचालक क्या है (What is Semiconductor in Hindi), अर्धचालक कितने प्रकार के होते हैं, अर्धचालक के गुण क्या हैं, अर्धचालक का उपयोग कहाँ होता है, अर्धचालक के फायदे और नुकसान क्या हैं.

अगर आप इस प्रकार के सभी प्रश्नों का जवाब जानना चाहते हैं तो इस लेख को पूरा अंत तक जरुर पढ़ें. आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको Semiconductor क्या है इन हिंदी के बारे में पूरी विस्तृत जानकारी देंगे. तो चलिए आपका ज्यादा समय न लेते हुए शुरू करते हैं इस लेख को.

अर्धचालक क्या होते हैं (What is Semiconductor in Hindi)

प्रकृति में कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो कि विद्युत के सुचालक होते है, अर्थात बिजली के संपर्क में आने पर उनमें करंट लगता है. और कुछ ऐसे पदार्थ भी होते हैं जो कि विद्युत के कुचलाक होते हैं, ऐसे पदार्थ जब बिजली के संपर्क में आते हैं तो उन पर करंट नहीं लगता है.

लेकिन इसके अलावा कुछ ऐसे पदार्थ भी हमारी प्रकृति में मौजूद हैं जिनमें सुचालक और कुचालक दोनों पदार्थ के गुण पाए जाते हैं. ऐसे पदार्थों को ही अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) कहते हैं. अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे डायोड, ट्रांजिस्टर, इंटीग्रेटेड सर्किट आदि के निर्माण में काम आते हैं.

अर्धचालक की परिभाषा (Definition of Semiconductor in Hindi)

अर्धचालक को हम निम्न प्रकार के परिभाषित कर सकते हैं –

अर्धचालक ऐसे पदार्थ होते हैं जिसमें सुचालक और कुचालक दोनों पदार्थों के गुण पाए जाते हैं.

उर्जा बैंड की अवधारणा के अनुसार कमरे के ताप पर अर्धचालक वे पदार्थ होते हैं –

  • जिनमें चालन और संयोजी बंद आंशिक रूप से भरे हुए होते हैं.
  • जिनके बीच का निषिद्ध ऊर्जा बैंड बहुत संकरा होता है. लगभग 1 इलेक्ट्रान वोल्ट की कोटि का.

अर्धचालक के उदाहरण (Example of Semiconductor in Hindi)

कुछ प्रमुख अर्धचालक निम्न हैं –

  • सिलिकॉन
  • जर्मेनियम
  • आर्सेनाइड
  • गैलियम

अर्धचालक के गुण (Properties of Semiconductor in Hindi)

अर्धचालक के कुछ विशेष गुण निम्न प्रकार हैं –

  • अर्धचालक पदार्थ की प्रतिरोधकता कुचालक पदार्थ से अधिक और सुचालक से कम होती है.
  • अर्धचालकों में प्रतिरोध का ऋणात्मक तापमान गुणांक होता है अर्थात तापमान में वृद्धि के साथ अर्धचालक का प्रतिरोध घटता है और विद्युत चालकता बढती है.
  •  जब एक उपयुक्त धातु की अशुद्धता अर्धचालक में डाली जाती है तो अर्धचालकों के वर्तमान गुण में बदलाव होता है. अर्थात इनकी चालकता कम या ज्यादा हो जाती है.
  • जब अर्धचालक अपनी Natural State में होते हैं तो वे ख़राब सुचालक की भांति व्यवहार करते है, लेकिन कुछ तकनीकी की मदद से अर्धचालकों में धारा का प्रवाह किया जाता है. जैसे कि डोपिंग तकनीकी के द्वारा.
  • अर्धचालकों की चालकता को बाहर से लगाये गए विद्युत क्षेत्र या प्रकाश के द्वारा भी परिवर्तित किया जा सकता है.

अर्धचालक के प्रकार (Types of Semiconductor  in Hindi)

अर्धचालक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं –

  • आतंरिक अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor)
  • बाह्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductor)
Types of Semiconductor  in Hindi

#1 – आतंरिक अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor)

आतंरिक अर्धचालक में किसी प्रकार की अशुद्धि नहीं मिली होती है. ये केवल एक ही प्रकार के तत्व से बने होते हैं. जर्मेनियम और सिलिकॉन सबसे आम प्रकार के आंतरिक अर्धचालक तत्व हैं. आतंरिक अर्धचालकों की विद्युत चालकता बहुत कम होती है.

#2 – बाह्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductor)

जब अर्धचालक पदार्थ में बहुत थोड़े से मात्रा में किसी धातु की अशुद्धि को मिश्रित किया जाता है तो अर्धचालक पदार्थ की विद्युत चालकता बढ़ जाती है. इस प्रकार से बने अर्धचालक को बाह्य अर्धचालक कहते हैं.

जैसे जर्मेनियम या गैलियम में एक उपयुक्त धातु की अशुद्धता को मिलाया जाता है तो इनकी चालकता बढ़ जाती है.

अर्धचालकों में इस प्रकार से धात्विक अशुद्धता को मिलाने की प्रक्रिया को डोपन कहते हैं और अर्धचालकों की चालकता बढाने की यह तकनीकी डोपिंग कहलाती है. 

बाह्य अर्धचालक भी दो प्रकार के होते हैं –

  • n Type Semiconductor
  • p Type Semiconductor

n Type Semiconductor क्या हैं

जब जर्मेनियम या सिलिकॉन में 5 संयोजकता वाले परमाणु की अशुद्धि मिलाई जाती है तो तो वह जर्मेनियम के एक परमाणु का स्थान ले लेता है.

अशुद्ध परमाणु के 5 में से 4 इलेक्ट्रान जेर्मेनियम के 4 इलेक्ट्रान के साथ एक – एक कर संयोजक बंध बना लेते हैं और 5 वां इलेक्ट्रान अशुद्ध परमाणु से अलग हो जाता है और क्रिस्टल के अन्दर मुक्त रूप से चलने लगता है. और जो यह मुक्त इलेक्ट्रान होता है यही आवेश वाहक का कार्य करता है.

इस प्रकार से शुद्ध जर्मेनियम में धातु की अशुद्धता मिलाने पर इसकी चालकता बढ़ जाती है. इस प्रकार से बने अर्धचालक को n – टाइप अर्धचालक कहते हैं. n Type Semiconductor में आवेश वाहक ऋणात्मक आवेश वाले होते हैं.

p – Type Semiconductor क्या हैं

जब जेर्मेनियम या सिलिकॉन में 3 संयोजकता वाले अशुद्ध धातु को मिलाया जाता है तो तो अशुद्ध धातु के 3 इलेक्ट्रान जेर्मेनियम के निकटतम 3 इलेक्ट्रान के एक – एक  इलेक्ट्रान के साथ मिलकर संयोजक बंध बना लेते है.

जेर्मेनियम का एक इलेक्ट्रान बंध नहीं बना पाता है इसलिए वह रिक्त रह जाता है और इस रिक्त स्थान को कोटर कहते हैं. बाहर से विद्युत क्षेत्र लगाने पर कोटर का नजदीक वाला इलेक्ट्रान कोटर पर आ जाता है जिससे नजदीकी इलेक्ट्रान रिक्त हो जाता और वहां पर कोटर बन जाता है.

इस प्रकार से कोटर क्रिस्टल के अंदर एक स्थान से दुसरे स्थान पर विद्युत के विपरीत चलने लगता है. इस प्रकार से बने अर्धचालकों को p – टाइप अर्धचालक कहते हैं. p – टाइप अर्धचालक में आवेश वाहक धनात्मक आवेश होते हैं.

अर्धचालक उपकरण (Semiconductor  Device in Hindi)

कुछ अर्धचालक उपकरण निम्न हैं –

  • p – n संधि डायोड
  • फोटो डायोड
  • प्रकाश उत्सर्जक डायोड
  • ट्रांजिस्टर

अर्धचालक के उपयोग (Uses of Semiconductor in Hindi)

  • अर्धचालकों का उपयोग अनेक प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है.
  • ट्रांजिस्टर, डायोड, इंटिग्रेटेड सर्किट आदि युक्तियों को बनाने में अर्धचालक का इस्तेमाल किया जाता है.
  • बिजली के सिस्टम, पॉवर ट्रांसमिशन बनाने में भी अर्धचालक का इस्तेमाल होता है.
  • ऑप्टिकल सेंसर में सहायक उपकरणों को बनाने के लिए भी अर्धचालकों का इस्तेमाल किया जाता है.

अर्धचालक के फायदे (Advantage of Semiconductor in Hindi)

अर्धचालकों के निम्न फायदे होते हैं –

  • अर्धचालकों को Heat (गर्म) करने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि अर्धचालक उपकरणों में कोई फिलामेंट नहीं होता है.
  • सर्किट को चालू करने पर अर्धचालक उपकरण तुरंत काम करना शुरू कर देते हैं, क्योंकि इन्हें गर्म करने की जरुरत नहीं पड़ती है.
  • अर्धचालक उपकरणों को कम वोल्टेज की आवश्यकता पड़ती है.
  • वैक्यूम ट्यूबों  की तुलना में अर्धचालक सस्ते होते हैं.  

अर्धचालक के नुकसान (Disadvantage of Semiconductor in Hindi)

  • वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में अर्धचालक उपकरण शोर अधिक करते हैं.
  • वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में अर्धचालक अधिक शक्ति को सहन नहीं कर पाते हैं.

FAQ For Semiconductor in Hindi

अर्धचालक क्या होते हैं?

अर्धचालक ऐसे पदार्थ होते है जिनमें कुचालक और सुचालक दोनों प्रकार के पदार्थों के गुण पाए जाते हैं.

अर्धचालक कितने प्रकार के होते हैं?

अर्धचालक 2 प्रकार के होते हैं – आतंरिक अर्धचालक और बाह्य अर्धचालक.

सेमीकंडक्टर को हिंदी में क्या कहते हैं?

सेमीकंडक्टर को हिंदी में अर्धचालक कहते हैं.

अर्धचालक का इस्तेमाल कहाँ होता है?

अर्धचालक का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे डायोड, ट्रांजिस्टर आदि बनाने में किया जाता है.

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हमने सीखा: सेमीकंडक्टर क्या है हिंदी में

इस लेख में हमने आपको अर्धचालक क्या है (Semiconductor Kya Hai) के बारे में बेसिक जानकारी दी है जिससे कि आप पहचान सको कि कौन से पदार्थ अर्धचालक होते हैं और इनका क्या उपयोग होता है. उम्मीद करते हैं आपको लेख समझ में आया होगा, इस लेख को सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें और दुसरे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं.

Editorial Staff
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